पापा ने अपने मोटे लंड को चाची की गांड में बेरहमी से डाला

PANKAJ DUBEY
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chachi ki gaand chudai bhateeji ki chut, papa ka mota lund meri gaand me dard
प्रेषक : आराध्या,

हाय फ्रेंड्स मेरा नाम आराध्या है। मै पजांब की रहने वाली हूं। मैं आज आप सब के साथ, अपनी आँखों देखी घटना को शेयर करने जा रही हूं॥ पजाँब में मेरे दादा जी जमीदार के नाम से मशहूर है. क्यूकीं हमारे पास बहुत खेत और जमीने है। मेरे पापा और चाचा उन खेतों की फसल उगाई करते है। आज से 5 साल पहले जब मेरी उम्र 16 साल की थी। तब मैने एक दीन मैने ऐसा दृश्य देख लीया, जीसे मैं आज तक नही भूला पायी।



गर्मीयों के दीन थे। उस समय मैं 12 क्लास में पढ़ रही थी मेरे इक्जाम्स खत्म हो चुके थे। तो छुट्टीया चल रही थी। मई का महीना था। मेरे मामा के घर पर शादी पड़ी थी। और मेरी माँ , मामा के घर गयी थी। उस दीन मेरे चाचा दादा जी को लेकर शहर चले गये थे। शायद कीसी ज़मीनी वीवाद को लेकर।
घर पर मैं और मेरी चाची सपना ही थे। मेरी चाची की उम्र उस समय 30 साल की थी। मेरी चाची को एक बच्चा नही था। वो दीखने में बहुत सुदंर थी, और हमेशा सूट सलवार ही पहन कर घर में रहती थी। उनका फीगर बहुत ही मस्त था। उनके मम्मे और गांड हमेशा सूट सलवार में कसे रहते थे। मैं पीछले तीन महीने से नोटीस कर रही थी की, मेरे पापा अक्सर मेरी चाची को अजीब नजरो से देखते थे। पहले तो मुझे लगा की शायद यूं ही पापा की नजर चाची पर पड़ जाती होगी, लेकीन धीरे-धीरे मुझे अहेसास हुआ की , पापा चाची के मम्मे और सलवार में कसी उनकी गांड पर अक्सर नज़र टीकाये रहते थे।
चाची तो पापा के सामने अपना मुह अपने दुपट्टे से ढ़क कर रखती थी, तो भला उन्हे कैसे पता चलेगा? लेकीन धीरे - धीरे मुझे भी चाची की के तेवर बदले-बदले से लगने लगे थे। मैने नोटीस कीया की, पापा के सामने चाची अपनी गांड कुछ ज्यादा ही मटका कर चलती थी। ये देखकर मैने सोचा की माजरा क्या है? इसीलीए मै भी चोरी-छीपे उन पर नज़र रखने लगी। एक दीन छत पर मैं और चाची दोनो गेंहूं धो कर, धूप में सुखाने के लीए डाल रहे थे, की तभी वहां पापा आ गये। पापा को देखकर चाची ने झट से अपने सर पर दुपट्टा डाल लीया। और झुके हुए वो खाट पर गेंहू डालते हुए, अपनी गांड इधर उधर मटकाने लगी।
मेरी नज़र तो पहले से ही चाची और पापा पर थी। और मै इतंजार ही कर रही थी की, दोनो में से सबसे पहले कौन क्या...हरकत करता है?? और चाची ने तभी अपनी गांड मटका कर धीरे-धीरे हीलाने लगी। मैने तीरछी नजर से पापा की तरफ देखा तो, पापा...चाची की मटकती हुई गांड ही देख रहे थे। तभी पापा ने कहा की - छोटी तूझे तेरी मां बुला रही है। मुझे पता था, की पापा मुझे यंहा से जाने के लीए जरुर कुछ ना कुछ बनायेगें॥
मैं छत से तुरतं नीचे जाते हुए, सीढ़ीयों के झरोखे से छत पर देखने लगी। मैने देखा की, पापा ने पहले चारो तरफ देखा और उसके बाद, वो धीरे से जाकर चाची के पीछे खड़े हो गये। चाची वैसे ही अपनी गांड बाहर नीकाले, झुक कर खाट पर गेंहूँ डाल रही थी। तभी मैने देखा की पापा अब चाची के गांड से सटते हुए , अपने पैंट के आगे का हीस्सा, चाची के गांड में घीसने लगे। ये देखकर तो मेरी आँखें हैरत से चौंड़ी हो गयी। पापा चाची के गांड में पीछे से अपना लंड पैंट के अँदर से घीसते हुए कुछ बोल रहे थे, और चाची भी वैसे ही झुकी गेंहूँ डालते हुए, पापा के लंड को पैंट के उपर से ही अपनी मस्त गांड पर रगड़वाती हुई, मजे ले रही थी और पापा से धीरे-धीरे बाते भी कर रही थी।

उनकी आवाज़ बहुत धीरे-धीरे आ रही थी, इसीलीए मैं कुछ समझ नही पायी की; वो लोग क्या बाते कर रहे थे। पापा ने थोड़ी देर चाची की गांड पर अपना लंड पैंट के अंदर से रगड़ते रहे, उसके बाद वो हटते हुए...चाची की गांड पर जोर का थप्पड़ मारे। थप्पड़ इतना जोर दार था की, चाची के गांड पर पड़ा वो थप्पड़..छत से नीचे तक आवाज पहुचां होगा। चाची वैसे ही अभी भी वैसे ही झुकी थी। सीर्फ थप्पड़ के साथ-साथ उनकी भी हल्की सी चींख नीकली थी बस। मैने देखा की, पापा छत पर से सीढ़ीयों की तरफ चले आ रहे थे। पापा को आता देख, मैं झट से सीढ़ीयों पर से नीचे भाग गयी।

और आज का दीन, जब घर पर खाली मैं, चाची और पापा बस तीन ही लोग थे। चाचा शहर से शाम से पहले आने वाले नही थे। और मां तो मामा के घर गयी थी। ये बात मुझे पता थी की, पापा आज चाची को जरुर चोदेगें और मैं भी इस चुदाई को अपनी आँखों से देखने के लीये बेताब थी। मैं चाची के कमरे में उनके साथ बैठ कर टी॰वी देख रही थी। मैने देखा की चाची बीच-बीच में उठ कर कमरे से बाहर जाती थी। और मुझे पता था की वो क्यूँ जाती थी?? क्यूकीं पापा पड़ोस के मेरे एक चाचा के घर पर थे। और चाची शायद यही देखने जा रही थी की, पापा आये की नही!!

थोड़ी देर के बाद, मुझे पापा की आवाज़ कमरे से बाहर सुनाई पड़ी!! वो मुझे बुला रहे थे, और पानी मांग रहे थे पापा की आवाज सुनकर, मैं जैसे ही चाची के पलंग पर से जाने के लीए उठी!! वैसे ही चाची ने मुझे रोक दीया, और कहा की मैं पानी दे देती हूं, तू टी०वी० देख। ये बात कहकर, चाची कमरे से बाहर चली गयी।
थोड़ी देर बाद जब चाची कमरे में आयी तो, मैं जानबुझ कर नाटक करते हुए चाची से बोली की, मैं अपने सहेली के घर जा रही हूं॥ और ये कहते हुए मैं चाची के कमरे से नीकलते हुए, जल्दी से सीढ़ी वाले कमरे में जाकर छुप गयी। क्यूकीं सीढ़ी वाला कमरा बहुत छोटा था। और उसमें भैंस के गोबर से बना इन्हन रखा था। मैं जानबूझ कर सीढ़ी वाले कमरे में छुपी थी। इसके दो फायदे थे, पहला ये की...उस घर में लोग तभी आते थे, जब इन्हन की जरुरत होती थी। और दुसरा फायदा ये था की, उस कमरे में से आँगन और बाकी घर साफ दीखायी पड़ता था।

मैने दरवाजा बहुत ही मामुली खोल कर रखा हुआ था। और मुझे आँगन साफ-साफ दीखायी दे रहा था। थोड़ी देर के बाद मुझे पापा दीखायी दीये, वो अपने कमरे से नीकलते हुए , आगँन में बीछे खाट पर बैठ गये और एक हाथ में सीगरेट पकड़े उसे पीने लगे। तभी थोड़ी देर में ही चाची भी, आँगन में आ गयी....और उन्हे देखकर तो मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी। उन्होने काले रंग की एक ब्रा और पैंटी बस पहन रखी थी। और उसमें वो बहुत ही ज्यादा सेक्सी लग रही थी। उनकी गांड पर वो पैंटी ऐसी लग रही थी , मानो कीसी ने जबरजस्ती पहना दी हो, बहुत ही छोटी और टाईट थी। जो उनकी बड़ी और चौंड़ी गांड की शोभा बढ़ा रही थी। मैं अपनी आँखें फाड़े उन्हे देख रही थी, और वो अपनी मोटी गांड हीलाते हुए घर के आँगन का दरवाजा बंद करते हुए पापा के खाट के पास आयी और नीचे बैठते हुए, उनकी लूंगी को खोल दीया।



बाप रे....पापा का लंड देखकर तो मेरी आँखे चौंधीयां गयी, पापा का लंड इतना मोटा और लंबा था की, वो चाची के हाथ की मुट्ठीयों में पूरी तरह कसा था। एकदम काला था, मानो जैसे पापा का लंड घोड़े के जैसा दीख रहा था। चाची ने पापा के लंड को अपने हाथो में पकड़े बोली- आप इसे कुछ खीलाते-पीलाते हो क्या ज्येठ जी? इतना बड़ा और मोटा है की, देखकर ही डर लगता है।



और ये कहते हुए

चाची, पापा के मोटे लंड को हाथों सें पकड़ कर सहलाने लगती है।

पापा खाट पर थोड़ा लेटते हुए, दीवाल के सहारे अपना पीठ टीकाते हुए बोले- क्यूँ तेरी चूत में जब 4 दीन पहले गया था, तब पूछ लीया होता?? पापा की बात सुनकर , अब मुझे पता चला था की, 4 दीन पहले चाची की तबीयत क्यूं खराब थी, और तभी चाची ने भी कहा- हां आप तो बोलोगे हु! 4 दीन पहले जानवरो की तरह मुह पर तकीया दबा कर चोदे थे। अगले दीन खाट पर से उठी भी नही थी। ओ...हो, चाची की बात सुनकर तो, मेरी भी छोटी सी चूत पर चीटीँयां रेगने लगी। और झट से मैने अपनी सलवार का नाड़ा खोला, और पैंटी नीचे सरकाते हुए एक उगलीं अपनी चूत में घुसा ली। और उसे धीरे-धीरे अँदर-बाहर करने लगी। तभी मैने देखा की चाची ने पापा के लंड को अपने मुह में लेकर चूसने लगी और पापा मजे में अपनी आँखें बंद कीये हुए चाची से लंड चुसवाने का मजा लेते हुए बोले- आ..सपना, तूझसे लंड चूसवाने का मजा ही अलग है। चाची लंड चूसते-चूसते बोली- क्यूँ भाई साहब...ऐसा क्या है मेरे मुह में , जो आप को मेरे चूसने पर इतना मजा आता है?? पापा ने चाची के बालो को पकड़ते हुए जोर-जोर से अपने लंड पर दबाते हुए बोले- आह...क्यूंकी तू रंडीयों की तरह चूसती है। ओ...हो, दोस्तो अब क्या बताऊं की क्या नजारा था चाची को पापा कीसी खीलौने की तरह इस्तेमाल कर रहे थे।
गप...गप...गप...की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी पापा, चाची के बालो को इतनी गंदी तरह पकड़े उनका मुह अपने लंड पर जोर-जोर से दबाते की, वो नजारा देख कर, मै पूरी तरह पसीने से भीग गयी, और चूत में इतनी तेजी से जोश में आते हुए अपनी उँगलीयां अंदर घुसा दी की....मुझे बहुत जोर का दर्द हुआ। लेकीन मैने अपना मुह भींच लीया। आँगन में बहुत ही गंदे तरीके से पापा , चाची की मुह को अपने मोटे लंड से चोद रहे थे। पापा का लंड चाची के मुह से नीकल रहे थूक से भीक चूका था। मुझे चाची का मुह तो नही दीख रहा था, लेकीन एक बात दावे से कह सकती हूं की, चाची की हालत खराब जरुर हो गयी थी। क्यूकीं जैसे ही पापा उनका मुह अपने लंड पर पूरा दबाते, चाची उनके जांघों को पकड़ते हुए अपना सर उपर उठाने की कोशीश करती थी। तभी मैने देखा...की, पापा खाट पर से उठे और फीर चाची को उठाकर खाट पर कुतीया बना देते है। और खुद खाट के पास खड़े हो कर, चाची की पैंटी को नीचे सरका देते ह। और एक जोर का थप्पड़ उनके गांड पर जड़ते हुए....अपना लंड चाची की चीकनी चूत पर रख कर, इतना जोरदार झटका मारा की, चाची के साथ-साथ मेरे भी मुह से चीख नीकल गयी। फर्क सीर्फ इतना था की चाची की चींखे...चील्लाहट में बदल गयी थी। वो अपनी टांगे छटपटाते हुए...आ...ईईईईउउउभाईई....साहब... मार....डालोगे क्या...??? बहुत दर्द..हो...रहा है। चाची रोते-और चीखते हुए छटपटा रही थी, और पापा के झटके और जोरदार हौते जा रहे थे। पूरा का पूरा खाट हील जा रहा था। तभी पापा ने अपना लंड नीकालते हुए चाची के गांड मेँ घुसाने लगे...तो चाची जोर-जोर से रोने लगी...और पापा से दूर हटने लगी तो। पापा ने एक जोर का थप्पड़ चाची के गांड पर मारते हुए बोले- रुकी रह भोसड़ी साली, पापा की बात सुनकर चाची वैसे ही अपनी गाँड उठाये, खाट पर पड़ी थी, और रोते हुए बोल रही थी

नही...भाई साहब...आपके पैर पड़ती हूँ , गांड में मत डालो, आप का बुहुत मोटा हे..आईईईईईईईईमम्मींमींम्म्म्मां छोड़....दो...आ..आ...आ...आ..नी..का..लोओओ ..चाची बहुत जोर-जोर से रो रही थी, पापा की गांड आगे होने की वजह से मुझे उनकी गांड में घुसा पापा का लंड नही दीख रहा था। लेकीन पापा अब धीरे अपने धक्के तेज करते हुए चाची की गांड चोदने लगे थे। चाची को बुरी तरह छटपटाता और रोता देख कर तो मेरी भी हालत खराब हो गयी थी, और उनकी इस तरह की चीखे और चील्लाहट सुनकर, मुझे ऐसा लगा की कहीं वो मर ना जाये सच मे। तभी पापा अपना लंड चाची के गांड में घुसाये, खाट पर चढ़ जाते है। और तभी मुझे उनका मोटा लंड दीखा, जो चाची की गांड फाड़ कर बुरी तरह घूसा था।

चाची की गांड देखकर, मैने अपने मुह पर हाथ रख लीया उनकी गांड कें छेंद में पापा का लंड जब अँदर जाता तो, चाची छटपटा जाती थी, और लंड जब बाहर आता तो, उनकी गांड के अंदर की चमड़ी भी खींचती हुई बाहर चली आती थी। पापा अब तक चाची की गांड करीब 5 मीनट तक चोदे थे। चाची की भी अब चींखे हल्की कम हो गयी थी। शायद अब उनको उतना ही दर्द हो रहा था जीतना वो सह सकती थी। पापा अब चाची की गांड जोर-जोर से मारने लगे: भाईईईईई..साह...ब.......गांड...फाड़ दी....आह...आआईईइआआह...मां...। चाची इसी तरह कभी सीसकती तो कभी रोती...और पापा अपना जोर लगाते हुए...उनकी गांड को करीब 20 मीनट तक चोद-चोद कर चाची के गांड में ही झड़ गये। और जैसे ही वो, अपना लंड चाची के गांड से नीकाले मेरी आँखें एक बार फीर फटी की फटी रह गयी। चाची की गांड पापा ने बुरी तरह चोदी थी, उनके गांड का छेंद अब छेंद नही अब बील बन गया था, जीसमे एक मोटा चूहा आराम से जा सकता था। उस दीन पापा ने चाची की जमकर, दो बार और गांड मारी...और चाची के गांड का दर्द पूरी तरह खतम कर दीया था। वो बात अलग है की, उस गांड चुदाई के बाद चाची की चाल एक हफ्ते तक बदल गयी थी।



दोस्तो ये मेरी जींदगी का पहला दृश्य था जब

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