दोस्त को दारु पीलाकर उसकी मां की चूत फाड़ दी

Xnight
By -
0

प्रेषक: अजय,




Hello फ्रेंड्स, मेरा नाम अजय है। और मैं मुबंई के एक कॉल सेंटर में जॉब करता हूं। ये मेरी जीदंगी की एक सबसे हसीन घटना है। जो मैं आप सब के साथ शेयर करने जा रहा हूं।
आज से 3 साल पहले , मैं एक कंपनी में जॉब पर लगा। वो एक कॉल सेंटर था। जॉब के पहले दीन ही ट्रेनीगं में इट्रोडक्सन हो रहा था।
ट्रेनीगं रुम में करीब 20 लोग थे। जीनमे से एक था, संदीप । धीरे-धीरे ट्रेनीगं रुम में मेरी और संदीप की अच्छी खासी दोस्ती हो गयी थी।



पूरे एक महीने के बाद, जब हम सर्टीफाई होकर, ट्रेनीगं रुम से फ्लोर पर काम पर लगे तो, एक दीन मैने संदीप से कहा- यार संदीप, चल एक दीन पार्टी करते है। उसने मुझसे कहा- हां यार, अब तो सैलरी भी आ गयी है, और दारु पीये भी बहुत दीन हो गया है। संदीप की बात सुनकर मैने कहा- हां वो तो ठीक है! लेकीन पार्टी करेगें कहां?? ये सुनकर, संदीप ने कहा- अरे मेरे घर पर करते है। मैने संदीप से कहा- क्यूँ...क्या घर पे तेरे मम्मी-पापा नही होगें क्या?? तब संदीप ने कहा- अरे मैने तूझे बताया नही! घर पे मेरे सीर्फ मम्मी बस है, पापा अब इस दुनीया में नही रहे, 4 साल पहले एक एक्सीडेंट में वो गुज़र गये...! संदीप की बात सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ, और फीर मैने बोला- लेकीन तेरी मम्मी तो है, अगर उन्हे पता चला तो??
ये सुनकर संदीप ने कहा- अरे भाई, मेरी मम्मी को पता है, की मैं दारु पीता हूं। कोयी टेंशन नही, कल संडे है मैं तूझे अपने घर का एड्रेस सेंड कर दे रहा हू, तू आ जाना..! उसके बाद संदीप ने मुझे ऑफीस से छुटने के बाद, अपने घर का एड्रेस सेंड कीया।

अगले दीन, दोपहर को मैं अपने घर से नीकला और संदीप के बील्डीगं के नीचे आकर मैने उसे फोन कीया। फीर संदीप, अपनी बील्डीगं के नीचे आया और मुझे अपने घर पर ले गया
उसके घर में घुसते ही, मैने जो नज़ारा देखा की मेरी आँखे चौधीयां गयी, सामने संदीप की माँ खड़ी थी। और वो इतनी खुबसुरत थी, की क्या बतांउ दोस्तो??
उसकी माँ ने हरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी, और हल्के लाल रंग का ब्लाउज पहना था। उसकी माँ का फीगर इतना जबरदस्त था की, मैं तो उसे देखता रह गया।
संदीप ने मुझे घर के अंदर आने के लीए कहा, और अपनी माँ से बोला की- माँ ये फ्रेंड है, अजय! और ये मेरे साथ ही काम करता है।
मैने संदीप की माँ से नमस्ते कीया, और फीर उसके बाद मैं संदीप के साथ, उसके बेडरुम में चला गया। संदीप ने पहले से ही, ह्वीस्की की बॉटल खरीद कर रखा था। मैं और संदीप दोनो बेड पर बैठे थे की, तभी उसकी माँ अंदर आयी...और बोली- बेटा तुम लोग के लीये कुछ ले कर आऊं??
ये सुनकर संदीप ने कहा- हां माँ...बस दो ग्लास ले कर आजा। ये सुनकर, उसकी माँ मुस्कुराते हुए बोली- लगता है आज तुम लोग की पार्टी है??
अपनी माँ की बात सुनकर, संदीप ने कहा- हां मां, बहुत दीन हो गया था, पार्टी करके...तो थोड़ा मुड़ बनाने के लीए। संदीप के बोलते ही..आंटी ने मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराए हुए बोली-
अजय तुभ भी पीते हो?? शकल और बॉडी से लगता नही? आंटी की बात सुनकर, मैने कहा- नही आंटी मैं नही पीता...वो तो संदीप ने फोर्स कीया था..इसलीए। ये सुनकर...संदीप ने मेरी तरफ देखते हुए बोला-
अबे...तू मुझे क्यूं फंसा रहा है?? संदीप की बात सुनकर मैं और आंटी दोनो हसने लगे, मै हंसते हुए आंटी की तरफ देखा तो, वो हँसते हुए बहुत ही खुबसुरत लगी रही थी।
जब वो हँसती थी, तो उनके गालो पर डींपल पड़ जाते थे, जो उनकी खुबसुरती को और बढ़ा देती थी। मेरी नज़रे आंटी पर ही थी, की तभी आंटी ने भी एक नज़र मुझे देखा और हँसते हुए ग्लास लाने चली गयी।
संदीप ह्वीस्की की बॉटल खोलने लगा, और तब तक आंटी भी आ गयी...ग्लास लेकर, संदीप ने ग्लास में पैक बनाया , और उसके बाद हम दोनो ने पीना शुरु कीया।

आंटी भी वंही बेड पर बैठ गयी, मैं और संदीप पीते-पीते बाते कर रहे थे, मैं बस संदीप की बातो पर हां..हूं करता, क्यूकीं मेरा ध्यान तो उसकी माँ पर था।
मैं जानबूझ कर, थोड़ा-थोड़ा पी रहा था, मेरा अभी एक पैग भी नही खत्म हुआ था की...संदीप ने दुसरा पैग बना लीया था। मैने एक चीज नोटीस कीया की, जब भी मैं आटीं की तरफ देखता था, वो भी मुझे देखती और अपने बालों को सवारती। ये देखकर मैंने संदीप से नज़रे बचाते हुए, अपने हाथो से ओके का साइन बना कर उन्हे इशारा करते हुए बताया की, आप बहुत मस्त लग रही हो।
ये देखते हुए, आटीं थोड़ा शर्मायी और मुस्कुराते हुए अपने होठ हीलाते हुए थैकं यू बोला। आटीं का ये रीयेक्शन देखकर मैं खुश हो गया, और समझ गया की काम बन गया है।

अब तक, संदीप ने चौथा पैग खतम कर लीया था, और वो अपने होश में नही था। उसका बॉडी झुलने लगा था, ये देखकर मैने कहा- अरे संदीप बस कर, बहुत ज्यादा हो गया है तूझे?? मेरी बात खत्म भी नही हुई थी की, तभी आंटी ने कहा-
अरे कहां हुआ अभी उसका?? इतना तो मेरे बेटे का नॉर्मल पैक है। और ये कहते हुए आंटी ने मुझे इशारे में बताया की पीने दो! आंटी का ये इशारा पाते ही, मैं समझ गया की आंटी क्या चाहती है?? और ये सोचते ही मै खुशी से पागल हो गया की, आंटी का भी मन है। और ये सोचते हुए मेरे अंदर जोश की एक लहर दौड़ गयी। और जोश में आकर मैने आंटी को आँख मार दी। ये देख कर आंटी शरमा गयी...और कुछ बोली नही। तभी संदीप ने अपनी लड़खड़ाती जुबान में कहा-

अबे...बना ना पैग?? ये सुनकर...मैने झट से संदीप के ग्लास में पैग बनाने लगा, इस बार मैने उसके ग्लास में सीधा 60 का पैग बनाते हुए बहुत थोड़ा सा ही कोलड्रीगं डाला....ये देख कर आंटी मुस्कुराने लगी, और वंहा से उठकर जाने लगी। तो मैने इशारा करते हुए पूछा - कहाँ जा रही हो?? तो आंटी ने इशारे में कहा की आती हूं।



दोस्त के मां की बड़ी चुचीयां और गांड नाईटी में

उसके बाद आंटी कमरे से बाहर चली गयी! मैने पैग बनाते हुए संदीप को दे दीया, संदीप ने पैग उठाया और एक बार में ही गटक लीया और बेड पर ही लेट गया। वो अब पूरी तरह से नशे में धुत्त था। तब तक आंटी आ गयी, मैने देखा की आंटी ने साड़ी उतार कर नाईटी पहन रखी थी।
और नाईटी में उनके बूब्स और गाँड को देखकर तो, मैं पागल हो गया, और मुझसे रहा नही गया। मैं झट से उठते हुए आटीं को अपनी बांहो में भर लीया। और बेतहाशा उन्हे चुमने-चाटने लगा।
तभी आंटी ने मुझे रोकते हुए कहा- यंहा नही , संदीप है यंहा पर..! मैने आंटी के गालो को चूमते हुए कहा- वो अब होश में कहां है?? उसे तो तुमने सुला दीया..। ये सुनकर आंटी ने मुस्कुराते हुए , मेरे गालो पर चीमटी काटते हुए बोली- बदमाश...!

अब मुझसे रहा नही जा रहा था। मैने आंटी की नाईटी झट से उतार फेंकी , ओह माई गॉड..! आंटी ने लाल कलर की ट्रासंपेरेट ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी, जीसे देखकर मेरा लंड पैंट में ही झटके मारने लगा। क्या लग रही थी आंटी, उनका असली फीगर तो अब कयामत ढ़ा रहा था।
34B-28-35 का उनका फीगर, लाल कलर की पैंटी में कयामत ढ़ा रहा था। उनके गोरे-गोरे और बड़े मम्मे को मैने ब्रा के उपर से सी पकड़ लीया और जोर से मसलने लगा- आंटी भी खड़ी-खड़ी अपने मम्मे मसलवाते हुए चील्लाने लगी- आह...हा...अजय...मसलो उ...ह और जोर से....हाय रे मेरी चुंचे। आंटी की मस्ती भरी चींखे सुन कर, मैं और जोश में आ गया, और उनका ब्रा पकड़ते हुए खींच कर फाड़ दीया, जीनसे उनकी बड़ी-बड़ी चुंचीया , बाहर लटकने लगी...ये देखकर मैने तुरतं ही उनकी एक चुचें को अपने मुह खोलते हुए जीतना भर सकता था...अपने मुह में भर कर चुसने लगा, और दुसरे हाथ से उनकी एक चुचें जोर-जोर से दबाने लगा-

आह...अजय...थोड़ा धी....रे....दर...द हो रहा है..आ..ई.....मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैने आंटी की चुंचीयों को 5 मीनट तक ऐसे ही खुब चूस-चूस कर और मसल-मसल कर लाल कर दीया। उनके मम्मे पूरी तरह भर गये थे, और उनके नीप्पल कड़े होकर खड़े हो गये थे। उनके मम्मे मेरे थूक से सना हुआ था।

मेरा लंड अप बेकाबू हो रहा था, मैने झट से अपने कपड़े उतारने लगा, मेरे साथ-साथ आंटी ने भी अपनी पैंटी उतार दी...। मेरा 7 इंच का लंबा और 3 इंच मोटा लंड जैसे ही बाहर नीकल, आंटी ने चौंकते हुए नीचे घुटनो पर बैठती हुई, मेरे लंड को पकड़ कर बोली-


बाप...रे...इतना बड़ा...ये तो मेरी चूत की चटनी बना देगा...और ये कहते हुए आंटी ने अपना मुह खोला और मेरे लंड को अपने मुह में भर लीया। ओह...दोस्तो मुझे कीतना मजा आ रहा था...मैं बता नही सकता, आंटी भी पूरी तरह जोश में आते हुए मेरा लंड ऐसे चूस रही थी की...बस पूछो मत।
आह...आंटी बहुत मजा आ रहा है...ऐसे ही। ओह संदीप देख तेरी मां को, कुतीया की तरह चूस रही है। मुझसे अब बर्दाश्त नही हो रहा था। मैने आंटी को वहीं नीचे फर्श पर ही कुतीया बनाया...और खड़े-खड़े ही थोड़ा झुकते हुए...मैने अपना लंड आंटी के चूत पर रखा और एक जोर का झटका मारा...मेरा आधा लंड सीधा उनकी गीली चूत में समा गया।


aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaeeeeeeईईईईईई...मम्मीईईईईईईईईईईई..चूत फ....ट...गयीईईईईई...। आंटी अपना मुह फांड़ कर इतना तेज रोने और चील्लाने लगी की...वो अपनी गांड सरकाते हुए मुझसे छूट कर भागने की कोशीश करने लगी....लेकीन मैंने दो-थफ्पड़ जोर का उनके गांड पर जड़ते हुए...उनकी कमर मजबुती से पकड़ी...और एक झटका और जोर का लगाया मेरा लंड उनकी टाइट चूत में फंसते हुए पूरा अँदर तक घूस गया।

हे....भग....वान....मरगींईईईईईईईईईईईईईई...अज....य नीकाआआआआआ...ल। और आंटी जोर-जोर से रोते हुए मेरे हाथ अपनी कमर से छुड़ाने लगी...और छटपटाने लगी।
लेकीन मै कहां सुनने वाला था...मैने अब आंटी को धीरे-धीरे चोदने लगा...मेरा लंड अब भी आंटी की चूत में फंसते हुए जा रहा था। संदीप नशे में धुत्त आराम से सो रहा था....उसे ये भी खबर नही की, उसकी मां कुतीया बन कर मेरा लंड अपनी चूत में घुसाये, दर्द से छटपटा रही है। मैं धीरे-धीरे आंटी की कमर पकड़ कर उसे चोद रहा था। और आंटी कमी अपना सर उपर करके रोते हुए छटपटाती, तो कभी नीचे फर्स पर रखकर। उनको छटपटाता और रोता देख मेरा जोश और बढ़ गया और मैने अब जोर-जोर के धक्के मारने लगा। तो अंटी अपने हाथ फर्श पर मारते हुए छटपटाने लगी। ये देख कर मैने कहा- क्यूँ दर्द हो रहा है कुतीया...गांड मत हीला साली....और ये कहते हुए मैने आंटी के गांड पर एक जोरदार थप्पड जड़ दीया।

करीब 5 मीनट उन्हो चोदते हुए...मैने देखा की अब उनका रोना कम हो गया है...और वो अपनी गांड भी एक जगह टीकाये थी। ये देख कर मैने कहा- मजा आ रहा है आंटी...?? ये सुनकर आंटी ने कहा- आह...हांआंईंईंईं...मेरे राजा...चूत तो फाड़ कर आह रख दी...कुत्ते...पूछ रहा है मजा आह..आ...रहा है की नही...चोदता रह...बहुत सालो बाद लंड घुसा था ईसी लीये थोड़ीइइईई कोरी हो गयी थी...आह...बहुत मजा आ रहा है..आईईईई..।

मैने अब आंटी के बालों को पकड़ते हुए उसे फर्स पर से उठाते हुए...अपना लंड घुसा कर वैसे चोदते हुए, मै उसे उसके बेडरुम में ले गया।
और उसे बेड पर कुतीया बनाते हुए, मैं बेड के नीचे खड़ा हो कर उसे जोर-जोर से चोदने लगा..। आईईईईईआह...आ...अह चोदो....और जोर से...फाड़ डाल कुत्ते...बहुत मस्त चोद रहा है...मैं अब आंटी की बात सुनकर जोश में आते हुए इतनी जोर जोर से उसे चोदने लगा की, आंटी ने भी अपनी गांड आगे पीछे करते हुए...मेरा साथ देने लगी। मैं आंटी के गांड पर थप्पड़ बरसाने लगा....ले कुतीया...बोल..हा? और फीर मैने अपनी रफ्तार जैसे ही पकड़ी..आंटी जोर जोर से चील्लाने लगी...आह...कुत्ते गयी मै...मार..जोर से झटका...आह....गयी...ये सुनकर मैने भी आंटी के बालों को पकड़ कर जोर से खींचते हुए उसकी चूत में धक्के मारने लगा। मैं आंटी के बालों को इस तरह खीचं - खीचं कर चोद रहा था की, अगर संदीप देख लेता तो...शर्म के मारे मर जाता। मैने एक जोर का झटका दीया और आंटी को लेकर बेड पर गीर गया। आंटी चील्लाते हुए अपनी टागें छटपटाते हुए झड़ने लगी। और मैं उनके उपर चढ़ा जोर -जोर से चोदते हुए मैं भी उनकी चूत में झड़ गया।

मैं वैसे ही उनकी चूत में लंड डाले उनके उपर लेटा था। मैं और आंटी दोनो हांफ रहे थे। आंटी ने मेरा हाथ चुमते हुए कहा-

थैक यूं अजय...तुमने तो मेरी बरसो की प्यास बुझा दी। मैने भी आंटी के पीठ को चुमते हुए मेरे हल्के खड़े लंड को थोड़ा नीकालते हुए एक झटका उनकी चूत में देते हुए कहा- अभी तो रात पड़ी है। झटके लगने की वजह से आंटी ने सीसकारी लेते हुए कहा- आह....बदमाश!!

उसके बाद शाम को मैने , एक बार फीर संदीप को दारु पीलाया, और रात भर उसकी मां को चोदा। कभी उसके बगल में कुतीया बना देता, तो कभी उसके मुह के उपर कुकओल्ड पोज़ में। ये आंटी को थोड़ा अटपटा लगता लेकीन लंड की प्यासी...रंडी बन चुकी थी मेरी। तो जो बोलता वो करती थी।

i hope की मेरी ये true story आप सब को पसंद आयी होगी। कमेंट करके जरुर बताये। THANK YOU ॥

-->

Post a Comment

0 Comments

please write your thaughts about this story 😊 😊

Post a Comment (0)
3/related/default