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सावधानी:
इस कहानी के,सभी पात्र एवं घटनायें काल्पनीक है। ये एक गंदी कहानी है, जीसे,पाठको के मनोरंजन मात्र के लीये,लीखी गयी है। इस कहानी में, अभद्र भाषा,प्रताड़ीत करना, रीश्तो में नाज़ायज़ संबध आदी सब का प्रयोग कीया गया है।
आज गांव में बड़ी भीड़ जुटी थी। क्योंकि आज पंचायत जो बैठी थी। शायद कुछ तो हुआ था। पंचायत के पांच मुखिया पेड़ के नीचे बैठे थे। और गांव वाले सब चारो तरफ से खड़े थे। "का रे तू सुधरेगा बब्बनवा तू सुधरेगा नही क्या?" एक पंचायत के सदस्य ने बब्बन की तरफ देखते हुए बोला। बब्बन जो वही पर खड़ा अपनी मुंडी नीचे किए हुए उस आदमी की बात सुनकर बोला... "हमने का किया...बल्ली काका? हम तो बस ऊ तलब पर अपनी भैंसो को पानी पिलाने गए थे। और उस पेड़ की छांव में जब हमरी आंख लग गई हमला पता ही नही चला, और हमारी भैंसो ने ललुआ की फसल में घुस गई।" बब्बन की बात सुनकर वहां पर खड़ा ललुआ चिल्ला पड़ा... "अरे ऐसे कैसे तोहरी नींद लग गई, जा कर देखो तुम सब गांव वाले, हमरी पूरी फसल खराब कर दी इसकी भैंसो ने, हमको कुछ नही पता, हमको हमारी भरपाई चाहिए...बस।" बब्बन- "हा तो चिल्ला कहे रहा है? तेरा जितना भी नुकसान हुआ, उतना फसल मैं तुझे दे दूंगा।" और ये कहते हुए बब्बन वन से गुस्से में अपना लाठी लेकर चला जाता है। पंचायत भी बर्खास्त हो जाति है। और सब अपने अपने घर चले जाते है।
हवस का आंगन
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October 08, 2023
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