भैया मेरी चूत का खैवेया

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प्रेषक: नीलम,

हैलौ दोस्तो, मै नीलम कानुपर से हूं। और मेरी उम्र 30 साल की है। मैं एक शादीशुदा हूं, और आज मैं आप सबको अपनी जींदगीं में हुए बदलाव को, शेयर करने जा रही हूं; की कैसे

मैने अपने भाई से चुदवा कर, अपनी चूत में लगी आग को शांत की।



23 साल की उम्र में मेरी शादी एक सरकारी नौकरी वाले इसानं से मेरे मां-बाप ने कर दी। मेरा गाँव बीहार में है और पति के साथ कानपुर में रहती हूं। आज 30 साल की उम्र है मेरी, लेकीन इन तीन सालो में, मेरे पति; मेरे चूत में लगी आग को बुझा नही पाये थे। उनका लंड बहुत ही छोटा है, करीब 4.5 इच का। खैर मुझे लंड की लम्बाई चौड़ाई कुछ लेना देना नही, बस मेरी चूत की आग को शांत कर पाये, मेरी नज़र में वही मर्द है।
शादी के तीन साल बाद, मैने अपने छोटे भाई राजन को, कानपुर घुमने के लीए बुलाई। उस समय मेरी उम्र 26 साल की थी। बड़ी-बड़ी दुधारु छातीया, और गोल कीसी मटके की तरह मेरी गांड। जब साड़ी में भी शेप बनाकर , मेरी साड़ी को बाहर की तरफ उठायी रहती तो, देखने वालो की नज़र मुझ पर से हटती ही नही थी।
मेरे भाई की उम्र उस समय 19 साल थी। उसे कानपुर शहर बहुत अच्छा लगा। तो मैने उसे कुछ महीने के लीए और रोक लीया, क्यूकीं उसे कानपुर में आकर 1 महीने हो गये थे।

एक दीन राजन , मेरे पड़ोंसीयों के साथ क्रीकेट खेलने गय था। और उसका मोबाईल फोन चार्ज में लगा था। तभी मैने सोचा की, घर पर फोन करके माँ को बता दू की, राजन अभी एक-डेढ़ महीने और रुकेगा। इसीलीए मै अपना फोन लेकर घर पर कॉल करने लगी तो, शायद मेरे फोन का बैलेंस खत्म हो गया था। तो फीर मैने, राजन का फोन चार्ज में से नीकालते हुए; घर पर कॉल करके माँ को बता दीया, और फीर कॉल डीसकनेक्ट करते हुए उसका फोन वापस चार्ज में लगाने जा रही थी की, मैने सोचा कोयी नयी फील्म देख लेती हूं; क्यूकीं राजन अक्सर नयी फील्मे डाउनलोड करके रखता था।
ये सोचते हुए मैं अपने बेडरुम में जाकर बेड पर लेटते हुए उसके फोन की वीडीयो फाइल को चेक करने लगी। तो मैने सबसे पहले वाली वीडीयो पर क्लीक कीया, तो उस वीडीयो को देखकर, मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी। मैने देखा की, उस वीडीयो में मैं थी जो बाथरुम में नहा रही थी। मैं ब्रा और पैंटी में नहा रही थी, मेरी बड़ी चुंचीया मेरी ब्रा में कसे हुए थे। और ब्रा में ठीक से आ भी नही रहे थे। तभी मैने अपनी ब्रा उतार कर अपनी चूचीयों पर साबुन लगाने लगती हूँ॥ ये देख कर तो मैं भी पागल हो गयी की, साबुन लगाते समय मेरी मस्त चुचीयां; इधर से उधर लहरा रही थी।

मैने पूरा वीडीयो देखा, और देखकर मुझे राजन के उपर बहुत गुस्सा आया! वो तो अच्छा हुआ की मैं पैंटी पहन कर नहाती हूं, नही तो उसने मेरी चूत भी देख लेनी थी। मगर फीर भी, मेरी बड़ी और गोल गांड पर चढ़ी हुई पैटीं देखकर, राजन के पसीने छुट गये होगें।
मुझे कुछ भी समझ में नही आ रहा था, की इस गंदी हरकत पर मैं राजन को डाटू की क्या करुं? क्यूकीं मैने उसे बुलाया था, और इस बात पर मैं उसे डाट देती तो, वो शर्मीदां हो जाता; और शायद वापस गाँव चला जाता। इसीलीए मैने फैंसला कीया की, मैं इसके बारे में राजन से कुछ नही कहूगीं!

वो पूरे दीन मैं सोचती रही की, क्या राजन मुझे सच में ऐसी नजरों से देखता है...अपनी सगी बहन को??शाम को जब राजन खेल कर घर पर आया तो, मैं उससे वैसे ही रोज की तरह पेश आयी। जैसे की मुझे उसकी गंदी हरकतो के बारे में कुछ पता ही ना हो।
राजन आते ही, सीधा बाथरुम में चला गया। हाथ-मुह धो कर वो बाथरुम में से बाहर आया, और आकर सोफे पर बैठ गया। मैने उससे कहा की: चाय पीयेगा? तो उसने मुझसे कहा: हाँ दीदी...थक गया हूँ, चाय मील जाती तो थोड़ी एनर्जी मील जाती। उसकी बात सुनकर मैं कीचन में से चाय बनाकर लायी और फीर मैने राजन को दीया और वहीं उसके बगल में बैठ गयी। मैने देखा की; चाय पीते हुए राजन बीच-बीच में मुझे तीरछी नीगाह से, मेरी ब्लाउज पर नजर मारे जा रहा था। उसका यूं इस तरह मेरी चूंचीयों को ब्लाउज में कसा देखना, मेरे अंदर एक सीरहन सी पैदा होने लगी। तभी राजन ने चाय पीते हुए कम को वहीं टेबल पर रख देता है। मैं कप को उठाते हुए वहाँ से चली जाती हूँ।
उस रात ना जाने क्यूँ मेरे अंदर की आग बहुत ज्यादा ही भड़क उठी थी। बीस्तर पर जाते ही, मैने अपने पति को बाँहों में भर लीया, और उन्हे पागलो की तरह चुमने चाटने लगी। लेकीन मेरे पति को जैसे कुछ अनुभव ही ना हो रहा हो, उन्होने मुझको ख़ुद से अलग करते हुए कहा की: नही नीलम आज नही, आज मैं बहुत थक गया हूं मुझे नींद आ रही है, लाईट बंद कर दो! ये सुन कर मेरा मन उदास हो गया, और मैं बेड पर से उठते हुए लाइट बंद की और वापस आ कर बेड पर लेट गयी।

मुझे नींद नही आ रही थी, चूत में आग लगी थी तो भला नीदं कैसे आती, मैं नाईटी के उपर से ही अपनी चूत रगड़ रही थी, और लंड के लीए तड़प रही थी की अचानक! मुझे रोहन का खयाल आया और मैं सोचने लगी की, क्यूं ना रोहन से ही चूत की गरमी ठंढी करवा लूं॥ मेरा भाई समझ के कीसी को शक भी नही होगा । एक मन तो कह रहा था की ये गलत है, लेकीन एक तरफ चूत की आग भी बढ़ी जा रही थी। आखीर बाद में मुझे अपनी चूत की ही सुननी पड़ी। और मैं बेड पर ही लेटे-लेटे ये सोचने लगी की, आज तो रोहन से चुदवा के ही रहूगीं। लेकिन माजरा ये फंस रहा था की, शुरुवात कैसे करु? ये बात जानते हुए भी की, रोहन की गंदी नजर मुझ पर है तो भी, मैं सीधे जाकर ये तो नही बोल सकती थी ना की, आ जा रोहन और अपनी बहन को चोद दे। इसीलीए मैं लेटे-लेटे सोचने लगी की क्या करुं? तभी मुझे एक तरकीब सूझी, और मैने झट से अपनी नाईटी उपर करते हुए, अपनी नाईटी उतारते हुए, ब्रा और पैटीं भी उतार दी। और और मैने वो नाईटी पहन ली, जीसे मैने अपने पति का जोश बढ़ाने के लीए ऑनलाइन ऑर्डर की थी। वो नाईटी मेरी पूरी की पूरी ट्रांसपेरेंट थी। और इतनी छोटी थी की गांड के उपर आते ही खत्म हो जाती थी। ये समझ लो की नीचे का भाग नाम मात्र के लीये ही तुपा होता था बस, मैने झट से लाईट ऑन कीया और देखा की सुनील खर्राटे ले रहे थे। मैने वो नाईटी नीकाली और पहन ली। पूरी की पूरी सेक्सी लग रही थी मै। मैने आईने में देखा तो शर्म से लाल हो गयी मैं। मुझे ये पहन कर राजन के सामने जाने में इतनी शर्म आ रही थी की क्या बताऊं?? लेकीन चूत की आग के सामने बेबस थी।

मैं वो नाईटी पहन कर, अपने बेडरुम से बाहर नीकलते हुए, डोर को बाहर से लॉक कर दीया और राजन के बेडरुम के सामने खड़ी हो कर, उसका दरवाजा खटखटाई थोड़ी देर के बाद, राजन ने दरवाजा खोला तो, मैं उसे और वो मुझे , दोनो एक दुसरे को आँखें फाड़े देखते रह गये। रोहन सीर्फ अंडरवेयर पर था। और उसका लंड खड़ा था, इसीलीए उसका अंडरवेयर आगे से उपर की तरफ उठा था, उसके अंडरवेयर का उभार देखकर मैं खुद हैरान थी की, इसका कीतना बड़ा है?? और ये सोचते ही , मेरी चूत फुदकने लगी।

अरे दीदी तूम...इस वक्त?? राजन ने मुझे उपर से नीचे तक देखते हुए बोला-। मैने भी बेशरम होते हुए उसके अंडरवेयर के उपर उठे हुए हीस्से को देखते हुए बोली- क्यूँ इस वक्त नही आ सकती क्या?? कुछ कर रहा था क्या?? राजन ने मेरी नज़रो को शायद ताड़ लीया था की, मैं उसके अडंरवेयर की तरफ़ ही देख रही थी। इसीलीए उसने भी बेशरमो की तरह अपने अंडरवेयर के उठे हुए उपरी हीस्से को सहलाते हुए बोला: अरे दीदी अकेले क्या करुगां मैं?? और ये कहते हुए हम दोनो, दरवाजे से अंदर बेडरुम में आ गये। मैं बेड पर बैठते हुए बोली- हालत तो तेरी ऐसी ही दीख रही है, जैसे की तू कुछ कर रहा था?? ये सुनकर...राजन ने कहा की: अरे दीदी ये हालत तो तूझे देखकर खराब हो गयी, तूझे पता भी है की तू इस नाईटी में कीतनी सेक्सी लग रही है??

मेरे बेड पर बैठने से, मेरी नाइटी थोड़ा उपर खीसक गयी मेरी पुरी जांघे दीख रही थी। और चूत की उपर की उभार भी राजन को साफ दीख रही थी। मुझे ये तो पता था की राजन का लोहा गरम है, उसे बस खाली मेरे इशारे की जरुरत है। तो मैने भी बीना देरी के, अपनी लाज शरम छोड़ते हुए बोली: अच्छा तूझे मैं इसमें सेक्सी लगती हूं? ये सुनकर, राजन ने कहा:- हां दीदी तू सच मे् बहुत सेक्सी लग रही है। मेरी चूत की आग राजन के उठे हुए अंडरवेयर के उभार को देखकर, बढ़ती जा रही थी। और मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था। तभी मैने बेबाक ही राजन से बोल दीया:- क्यू तूने तो मुझे पूरी नंगी देखा है तब नही आ कर बताया मुझे, की दीदी तू मुझे नंगी बहुत सेक्सी लगती है।

ये सुनकर राजन की शकल देखने लायक थी। वो कुछ बोलने के बजाय , इधर-उधर देखते हुए वो..वो मै..मैं करने लगा। उसकी हालत देखकर मैं मुस्कुराते हुए बोली- अरे मेरे प्यारे भईया, अगर तूझे अपनी दीदी को नगीं देखना इतना पसंद है तो, सीधा आकर मुझसे बोल देता ऐसे छुप-छुप कर मोबाईल में रीकॉर्ड कर के देखने में क्या मजा??
ये सुनते ही राजन खुशी से झुम उठा..और मेरे पास आते हुए बोला:- सच में दीदी?? मैं भी मुस्कुराते हुए बोली:- अरे हां रे पगले, आखीर लड़कीयों का भईया ही तो पहला संईया होता है। क्यूँ बनेगा मेरा संईया?? ये सुनकर राजन ने मुझे झट से अपनी बाँहों में भरते हुए बीस्तर पर लेट गया और मेरे गुलाबी गालो को चुमते हुए बोला- मुझे तो यकीन नही हो रहा है की, मेरे सपनो की रानी मेरी बाँहों में है!!
राजन की बात सुनकर, मैने उसके बालों में अपने हाथ फीराते हुए बोली:- बहन अपने भाई के लीए सपनो की रानी नही, बीस्तर की रानी होती है। और इतना कहते हुए, मैने राजन के बालों को पकड़ते हुए उसके सर को अपनी मस्त चूंचीयों पर दबा देती हूं। आह...कीतना मजा आ रहा था मुझे...राजन कीसी जानवर की तरह मेरी चूंचीयों को अपने हाथों में पकड़ कर मसल रहा था। मुझे मेरी चूंचीयों में दर्द भी हो रहा था, लेकीन उस दर्द में भी बहुत मजा था।

आ...ह..बहुत मजा आ रहा है..काश तेरे जीजा ने भी कभी ईसी तरह दबाया होता...आहा...उह...मम्मी!!! राजन ने झट से मेरी नाईटी पकड़ते हुए, मुझे थोड़ा उठा कर मेरी नाईटी को मेरे मस्त बदन से अलग कर देता है। मेरी गुब्बारे जैसी चूंचीयां देख कर राजन पागल हो जाता है, और मेरे उपर लेटते हुए; मेरी एक तरफ चूंची को अपने दोनो हथेलीयों से पकड़ते हुए बोला:- हाय रे दीदी तेरी चूंचीयां तो पूरी की पूरी दूध से भरी टैकं है। और ये कहते हुए उसने अपने दोनो हथेंलीयों से मेरी चूचीं को जोर इतनी जोर से दबाया की, मेरी टाईट चूचीं भी उसकी हथेली में सीमट गयी, और उपर का हीस्सा फुल कर बाहर आ गया, जीसे राजन मजे ले ले कर चूस रहा था। मेरी चूचीयों में बहुत तेज दर्द हो रहा था। क्यूकीं राजन ने उसको बुरी तरह जकड़ रखा था। मै ऐसे ही बेड पर लेटी तड़प रही थी। और मेरा बेरहम भाई मेरे उपर लेटा मेरी चूँचीयों को बारी-बारी से चूस और मसल-मसल कर मजे ले रहा था।

हाय रे....राजन...दर्द हो रहा है...आह...नही..नही दातं से नही...हाय...हाय भगवान...राजन । राजन मेरे उपर लेटा अपनी मनमानी कर रहा था...उसने मेरी चूंचीयों को मन भरने तक चूस-चूस कर लाल कर दीया , फीर मेरी चूंचीयों को आजाद करते हुए बेड पर से उठते हुए बोला- हाय रे दीदी, बहुत मजा आया, ऐसी चूंचीयां मीले तो जींदगी भर चूसता रंहू। मैं थोड़ा सीसकते हुए बोली:- हां रे बेरहम, तभी इतनी बेरहमी से मसल-मसल के चूसा है। देख जरा हालत इसकी...और ये कहकर मैने अपनी लाल पड़ गये चट्टे को राजन को दीखाने लगी। ये देख कर राजन मुस्कुराया और बोला- अब दर्द नही होगा दीदी..क्यूकीं अब जो चूसने जा रहा हूं, उसमें मजा ही मजा है। ये बोलकर राजन ने मेरी दोनो गोरी टांगो को पकड़ कर हवा में उठा देता है। मैं समझ जाती हूं की, राजन अब मेरी चूत चूसने जा रहा है...इस खयाल से ही मैं मारे खुशी के पागल हो जाती हूं, क्यूकीं चूत चूसवाना तो मेरा खुद का एक सपना था। मैने झट से अपनी टांगे बाहर की तरफ उठाते हुए चौड़ी कर लेती हूं ॥ और जैसे ही राजन का मुहं मेरी चूत पर लगता है। हाय...क्या बताउं मुझे कैसा नशा चढ़ा...हाय रे भईया...ऐसे ही चुसो...मैं पागल हो जाउगीं आह....उह्ह्ह्म्म्म्...हां...हां...जीभ घुसा के. हाय रे....तभी राजन ने अपनी एक उगंली मेरी चूत में घुसाते हुए मेरी चूत का दानो को जीभ से चाटने लगता है....और मुझे इतना मजा आया की...मैने् राजन के सर को पकड़ते हुए...अपनी चूत पर दबा दीया। राजन अब और जोर से मेरी चूत चाटने लगा और मैं मारे मस्ती के चील्लाते हुए झड़ने लगी। मुझे शांत होता देख...राजन ने मेरी चूत को छोड़ते हुए मेरे बगल में आकर लेट गया। और मुझे अपनी बाँहों में भरते हुए बोला- क्यूं दीदी...मजा आया?? मैने राजन के हाथो को पकड़ते हुए चूम ली , और कुछ बोलने जा ही रही थी की, मेरे बेडरुम का दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनायी दी। मैं और राजन दोनो घबरा गये, मैं कुछ ज्यादा ही घबरा गयी थी की, पति के सामने ये नाईटी पहन कर कैसे जांउ???


दोस्तो स्टोरी थोड़ी लंबी है, इसी लीए इस पार्ट में बस इतना ही, अगले पार्ट में आप पढ़ेगें की कीस तरह मेरा भइया मुझे चोद कर,

भैया मेरी चूत का खैवेये

बना ॥

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