दामाद जी ने चादर ढुँस कर चोदा मूत मारी मेरी चूत

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प्रेषक: रेशमा,

हैलो फ्रेड्स मेरा नाम रेशमा है। और मै मुबंई की रहने वाली हूं। मेरी उम्र 46 साल की है, पति के गुजरे 8 साल हो गयेथे, घर में मेरा एक बेटा और एक बेटी है। बेटी की शादी हो गयी है। 43 साल की उम्र मे भी मेरा बदन काफी गदराया हुआ है, मेरे बड़े-बड़े बूब्स और गाँड जवान लौडों के भी लंड को हीलवाने पर मज़बूर कर दे, ऐसी मस्त गांड है मेरी



खैर कहानी पर आते है। एक दीन मेरा बेटा, काम के सीलसीले में आउट ऑफ टाउन चला गया। अब मैं 3bhk के फ्लैट में अकेली थी। मैं हॉल में सोफे पर बैठ कर टी॰वी॰ देख रही थी। की तभी मेरे फोन पर मेरी बेटी का कॉल आया उसने मुझसे कहा की, मां तू अकेले वंहा क्या करेगी तू मेरे घर पर चली आ। रोहन ने बताया की वो एक महीने बाद ही कंपनी के काम से लौटेगा।

अपनी बेटी की बात मानते हुए मैने हाँ कर दी, और उसी दीन मैं अपनी बेटी के घर पहुंच गयी। घर में मेरी बेटी नीरु अकेली थी, मेरे दामाद 'राजीव' ऑफीस गये हुए थे।
शाम को दामाद जी जब घर पर आये तो, वो मुझे देखकर मेरे पैर छुए और बोले की,- सासु मां आप यंहा और इतने दीन बाद, । तब तक मेरी बेटी नीरु जो वाशरुम मे थी,
वो हॉल में आते हुए बोली- मम्मी अब एक महीने के लीए यंही रहेगी, रोहन काम के सीलसीले में बाहर गया है ना तो मैने ही मम्मी को बुला लीया।
दामाद जी ने कहा- ठीक कीया, वैसे भी सासु मां कहां जल्दी आती है। दामाद जी की बात सुनकर मैने कहा- आप बुलाते ही कहां हो दामाद जी? दामाद जी ने कहा- मेरे बुलाने पर क्या आप आ जाती सासु माँ?? दामाद जी की बात सुनकर मैने कहा- अरे दामाद जी एक बार बुला कर तो देखते, क्यूं नही आती।
तब तक मेरी बेटी ने कहा की आप लोग बैठो, मैं चाय लेकर आती हूँ॥ उसके बाद मेरी बेटी कीचन में चाय बनाने चली गयी। मैं और दामाद जी, सोफे पर बैठ कर बाते करने लगे।
दामाद जी ने कहा- सासु माँ 1 साल में आप और भी खुबसुरत हो गयीं है। दामाद जी के ऐसा बोलने पर मुझे थोड़ा अच्छा लगा, और मैने कहा- क्यूँ मज़ाक उड़ा रहे हो दामाद जी, अब तो मेरी उम्र हो चली है। दामाद जी ने कहा-
ये मज़ाक नही सच है , आप सच में बहुत खुबसुरत है। और ये कहकर, दामाद जी मेरे बदन को ताड़ने लगे।
उनका इस तरह मेरे बदन को देखना, मेरे अंदर की औरत को जगा दीया, और मैने सोचा की- लगता है दामाद जी को मैं पसंद आ गयी हूँ, इसीलीए तो वो मेरे बदन को घुर रहे है।

और ये सोचते हुए मेरी चूत फड़फड़ाने लगी, और मैं कुछ
बोलने ही वाली थी की, तब तक नीरु आ गयी चाय लेकर
हम लोग ने चाय पीया, उसके बाद रात को 8 बजे नीरु
कीचन में खाना बना रही थी, मैं अपने बेडरुम में लेटी थी
की तभी वंहा दामाद जी आ गये। दामाद जी को देखकर मैं
बेड पर उठ कर बैठ गयी, और बोली- क्या हुआ दामाद जी
आप का मन लग रहा है क्या मेरे बीना?? तभी दामाद जी
बोले- सच कहा सासु मां, मुझे आप बहुत अच्छी लगती है
आज से नही, बल्की जब से आप को देखा था तब से। दामाद जी की बात सुनकर...मैं मन ही मन बहुत खुश हो
गयी और मुझे यकीन नही हो रहा था की, दामाद जी को
इतनी जल्दी है चोदने की, ये सोचते हुए मैने मुस्कुरा कर
बोला- क्यूं दामाद जी, मेरी बेटी खुश नही कर पाती क्या
आपको? ये सुनकर दामाद जी ने मेरा हाथ पकड़ते हुए बोले-
अरे सासु माँ आपके मस्त बदन के सामने वो कुछ नही है।

दामाद जी के मुह से अपनी तारीफ सुनकर, मैं खुश हो गयी
और दामाद जी के हाथ पर मैने भी हाथ रख दीया। फीर क्या था दामाद जी को समझते देरी नही लगी...और वो
झट से...मुझे अपनी बाहों में भरते हुए बेड पर लेट गये।
और वो मुझे पागलो की तरह चुमने लगे...बरसो की प्यासी
मैं भी दामाद जी को कस कर अपनी बांहों में जकड़ लीया
और उनका साथ देते हुए, अपने होठ खोल दीये।
दामाद जी ने अपना मुह मेरे अंदर डाल कर..बेरहमी से मेरे
होठो को चुसने लगे, मुझे बहुत मजा आ रहा था। करीब
5 मीनट तक दामाद जी ने मेरे होठो को चूस-चूस कर लाल
कर दीया, तभी मेरी बेटी ने दामाद जी को कीचन में से ही
आवाज लगाई....बेटी की आवाज सुनकर, मैं और दामाद जी झट से अलग हो गये...। फीर उसके बाद दामाद जी
कीचन में चले गये।

रात को खाना खाते समय, दामाद जी मुझे और मैं उन्हे देख
कर मुस्कुरा रहे थे। फीर हम सब खाना खा कर सोने चले
गये, दामाद जी सोने जाने से पहले मुझसे बोले थे की, रात
को दरवाजा खोल कर रखना मैं आउगां, ये सुनकर मैं खुश
हो गयी, लेकीन डर भी था की, अगर कहीं नीरु को पता
चल गया तो,
उस रात मैने...दरवाजा बंद नही कीया, खाली दरवाजा भीड़का दीया, और बेड पर आकर अपनी साड़ी और ब्लाउज
उतार दीया, मैं सीर्फ पैटी और ब्रा पहन कर बेड पर लेटी
थी, और अपनी टांगे फैला कर अपनी पैंटी के अँदर हाथ डालकर अपनी चूत सहलाते हुए सोचने लगी की, आज तो
दामाद जी मुझे खुब चोदेगें...आह कीतना मजा आयेगां।
और ये सोचते हुए मैं अपनी चूत को रगड़ने लगी और घड़ी
की तरफ देखा तो अभी 10:30 ही हो रहा था। और फीर मैं
यूं ही अपनी चूत रगड़ते हुए दामाद जी का इतंजार करने लगी। इतंजार करते-करते मुझे पूरे 2 घंटे हो गये थे। और
अब मुझसे चूत की खुज़ली बर्दाश्त नही हो रही थी।
तभी मेरे रुम का दरवाज़ा खुला, मैने दरवाजे की तरफ देखा
तो दामाद जी, अंदर आकर रुम को अंदर से लॉक कर रहे
थे। मैं दामाद जी को देखकर खुश हो गयी और झट से बेड
पर से उठते हुए उनके गले से लीपट गयी।
दामाद जी भी मेरी भारी भरकम गाँड को पैटीं में कसी देख
बर्दाश्त नही कर पाये, और मेरे होठो को चुसते हुए मेरी
गांड को अपने हाथो से मसलने लगे। दामाद जी ने थोड़ी देर
मेरे होठो को चूसते हुए बोले- वाह! सासु मां तुम्हारी गांड तो
इस पैटीं में कयामत लग रही है। मैने भी मुस्कुराते हुए अपनी
गांड हीलाते हुए कहा- आपके लीये ही है दामाद जी...



ब्रा में कसी मेरी मस्त चुंचीया देख दामाद जी




इतना कहना था की दामाद जी ने मुझे बेड पर धक्का देते
हुए बेड पर गीरा दीये, और मेरे उपर चढ़ कर मेरी ब्रा को
पकड़े हुए खींच कर फाड़ दीये। ब्रा फटते ही मेरें मस्त बड़े
बड़े बूब्स बाहर लटकने लगे। ये देखकर दामाद जी ने मेरे
बूब्स को पकड़ते हुए अपने मुहं में भर कर चुसने लगे। आह
कीतना मजा आ रहा है...दामाद जी, आह...चुसो..ऐसे
ही दामाद जी...चुसो।

दामाद जी ने मेरी चुचीयों को मसल-मसल कर और चूस-चूस
कर लाल कर दीया था। उसके बाद दामाद जी बेड पर सीधा
लेटते हुए अपना अडंरवेयर उतार दीये। उनका लंड देखकर
तो मैं मस्त हो गयी, करीब 7 इंच का लंबा लंड एकदम
खड़ा था, मैं उनका लंड अपने हाथो में पकड़ लीया तभी
दामाद जी बोले- देख क्या रही हो सासु मां, चुसोगी??
दामाद जी ने इतना कहा की, मैने झट से अपना मुह खोलते
हुए उनके लंड को अपने मुह में भर लीया और चुसने लगी।
दामाद जी को मजा आने लगा और वो अपना गांड उठाते हुए मेरे मुह में धक्का देने लगे...उन्होने अपने हाथो से
मेरे सर के बाल पकड़ रखे थे...पहले तो धीरे-धीरे धक्का
दे रहे थे बाद में उनके धक्को की रफ्तार तेज हो गयी। और
एक जोर के धक्के के साथ उन्होने अपना लंड मेरे गले तक
उतार दीया। और वैसे ही मेरा सर दबाये रखे, मै छटपटाने
लगी...मुझसे सास नही लीया जा रहा था। तो मैं दामाद जी
के जांघो पर हल्के-हल्के हाथो से मारने लगी..तो दामाद जी
ने मुझे छोड़ दीया...मैने झट से अपने मुह में से उनका लंड
नीकाल दीया, लंड के साथ-साथ ढेर सारा थूक भी नीकल
गया, मैं हाफ रही थी...और फीर कुछ देर बाद मैने उनका
लंड अपने मुह में घुसाते हुए उनके हाथो को अपने सर पर
रख दीया...
दामाद जी ने एक बार फीर मेरा सर पकड़ते हुए अपना लंड
मेरे गले तक घुसा दीया...और फीर थोड़ा टाईम मेरे सर को
दबाये रखा फीर छोड़ दीया।

ऐसे ही दामाद जी ने 8 से 10 बार कीया, और इतने समय
में मेरी हालत खराब कर दी। मेरा चेहरा पूरा लाल हो गया
था और गला दर्द करने लगा था। फीर दामाद जी ने..
मुझे नीचे लीटाया और मेरी टांगो को चौड़ा करते हुए अपना
मुह मेरी चुत पर रखते हुए चूसने लगे।

मैं तो पागल हो गयी, क्यूकीं आज चुत चुसायी का मेरा पहला मौका था, मेरे हजबेंड ने कभी भी मेरी चूत नही चाटी
थी, मुझे बहुत मजा आ रहा था, और दामाद जी का सर मैने अपनी चूत पर दबाते हुए कहा- आह....दामाद जी, आप तो पूरे मास्टर हो, आह...बहुत मजा आ रहा है..
दामाद जी...मेरी चुत को दानो को पकड़ कर खींच लीया और उठते हुए अपना लंड मेरी चूत पर रखते हुए जोर का
धक्का मारा...और आधा लंड मेरी चूत को चीरते हुए अँदर
घुस गया...मै दर्द से चीख पड़ी- आईइअईईइअईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईइईई...दामाद जी..
फट गयी...चूत...आ...ई....। दामाद जी ने एक और
जोर दार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मेरी चूत को
फाड़ता उसकी गहराई नाप दीया, मुझे ईस बार ऐसा दर्द
हुआ जैसे कीसी ने चूत में लोहा घुसेड़ दीया हो...और जैसे
ही चील्लाई...तब तक दामाद जी ने पास में पड़ी चादर उठा
कर मेरे मुह में घुसा दीया, और मै चील्ला नही पायी बस
गूगूगूगूगूगूगूउउंउंउंउंउंउंउंउंउंम्म्म्म्म की आवाज नीकल रही थी।
फीर भी मेरी गुगुवाने की आवाज काफी तेज थी, जो पूरे कमरे में गुंज रही थी। दामाद जी मेरे मुह में चादर घुसेड़े मेरी
चूत का भोसड़ा बना रहे थे...बहुत सालो से ना चुदी होने
की वजह से मेरी चूत की दीवारे टाईट हो गयी थी। और आज दामाद जी उन्ही चूत की दीवारों को अपने मोटे लंड से
ढीला कर रहे थे। वो अफनी गांड उठा उठा कर जोर से धक्के मारते और थप-थप की आवाज पूरे कमरे में गूजं रही थी, वो मुझे जोर-जोर से चोदते हुए गांलीया देने लगे-

आह...साली...क्या चुत है तेरी...टाईट है ले...और फीर
एक और जोर का धक्का...ले...मादरचोद...तेरी बेटी की
भी चूत...ऐसे ही चोदी थी....वो भी रोज ऐसे ही चील्लाती है...ले साली कुतीया...उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्भ्पगूगूगूगूगूगू
क्यूं दर्द हो रहा है दामाद के लंड से?? आ...मादरचोद,?

दामाद जी मुझे ऐसे गांलीया देते हुए...चोदते हुए मेरी चूत का बाजा बजा रहे थे। और मैं दर्द से तड़प रही थी, दामाद
जी के मोटे लंड ने मुझे करीब तीन मीनट तक रुला-रुला कर मेरे मां -बाप और नानी की याद दीला दी, उसके बाद
मेरी चूत ने उनके लंड के लीये जगह बना लीया था। और अब मेरा दर्द कम हो गया था, और मजा आने लगा था...
दामाद जी का लंड अब जब मेरी चूत की दीवार को घीसते
हुए अंदर जाता तो, हल्के दर्ध के साथ मजा भी आता...
खैर दामाद जी को ऐसे ही चोदते-चोदते 10 मीनट हो गया
और मैं मजे में दामाद जी के कमर पकड़े नीचे से अपनी गांड
उठा कर धक्के मारने लगी...

ये देख दामाद जी ने अपना लंड मेरी चूत से नीकालते हुए
मुझे कुतीया बना दीया...और मेरी गांड पर जोर का थप्पड़
जड़ते हुए अपना लंड फीर से मेरी चूत में घुसा कर जोर-जोर का धक्का मारने लगे, आह...बहूत मजा आ रहा
था....दामाद जी का पूरा का पूरा लंड मेरे अँदर घुसता।
दामाद जी अब अपने पैरो पर थोड़ा खड़े होते हुए...मेरी
बालों को पकड़ कर खींचते हुए मुझे गालीयां देते हुए जोर
जोर से चोदने लगे...


...कुतीया बना दीया...साली....बोल मादरचोद...मजा
आ रहा है दामाद के लंड का...आ बोल....

अब मैं कैसे बताती की मुझे कीतना मजा आ रहा था...मेरे
मुह में तो दामाद जी ने चादर ढुंस रखी थी, खैर मैं तो मजे
ले रही थी....दामाद जी की गांलीया मुझे और जोश में भर
देती थी...वो कीसी सांड की तरह अब धक्का मारते हुए बोले--

चादर नीकाल कुतीया और बता कैसा लग रहा है मेरे लंड से चुदते हुए...। मैं जैसे ही चादर नीकालने के लीये अपना हाथ उपर उठायी...दामाध जी ने अपना लंड बाहर नीकाल लीया...और अचानकर! से उनका लंड मेरे चूत में पूरा घूस
गया...ये जोर दार झटका मै बर्दाश्त नही कर पायी, और मेरी चूत फूलने पीचकने लगी और मेरी चूत से भलभलाते हुए मूत नीकल गयी....ये देख दामाद जी जोश में आ गये और मेरी गांड पर जोर-जोर के थप्पड़ मारते हुए, जानवरो
की तरह चोदने लगे। ऐसी चुदाई से मै झढ़ने के करीब आ गयी...और मैने मुह से चादर नीकालते हुए जोर जोर से
चील्लाते हूए बोली-

दामाद जी...चोदो....ऐसे..ही॥ मेरी चूत से मूत नीकाल दीया...भगवान के लीये ऐसे ही चोदते रहो मै झड़ने वाली हूं,

ये सुनकर दामाद जी ने मेरी गांड पर थप्पड़ बरसाते हुए बोले- ले साली फीर....

और दामाद जी ने ऐसा झटका मारने लगे की, एक बार फीर मेरी मूत नीकल गयी...और आँखे पलटने लगी, शरीर
थर-थर कांपते लगी...ऐसा मजा था...जीसके खयाल के लीये औरत तरसती है। मैं सीर्फ इतना ही बोल पाई- ग..ई
ईईग.ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई...और ये कहते हुए मैं झड़ने लगी।

दामाद जी भी 6 से 7 धक्के मारे और अपना गरम मर्दाना पानी मेरी बच्चेदानी में छोड़ने लगे....उनका गरम पानी मुझे और आंनद पहुचां रहा था। इस तरह का यौन सुख मुझे मेरी जीदंगी में पहली बार मीला था।

अब मैं अपने दामाद की दीवानी हो गयी हूं, उनके एक आवाज पर मैं कहीं पर भी अपनी टांगे खोल देती हू। उसके बाद से दामाद जी और मेरे बीच एक संबध बना गया, जो आज तक चल रहा है, और कीसी को पता भी नही है...वो मुझे हर हफ्ते दो से तीन बार जरुर चोदते है...


आप को मेरी ये सच्ची कहानी कैसी लगी कमेंट कर के जरूर बताये...!

धन्यवाद

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